धनतेरस 2025- तारीख और तिथि
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ-18 अक्टूबर 2025, शनिवार, दोपहर 12:20 बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त- 19 अक्टूबर 2025, रविवार, दोपहर 1:52 बजे
धनतेरस दीवाली पर्व का पहला दिन होता है और इसे धन, स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
धनतेरस, जिसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है, दीवाली पर्व का पहला दिन होता है और इसे स्वास्थ्य, धन और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष 2025 में धनतेरस की त्रयोदशी तिथि 18 अक्टूबर दोपहर 12:20 बजे से शुरू होकर 19 अक्टूबर दोपहर 1:52 बजे तक रहेगी। इस दिन का मुख्य महत्व भगवान धन्वंतरि और देवी लक्ष्मी की पूजा में है।
मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि अमृत कलश और जड़ी-बूटियों के साथ प्रकट हुए थे और उन्होंने रोगों से मुक्ति और स्वास्थ्य का आशीर्वाद दिया। इसलिए धनतेरस पर धन्वंतरि पूजन करना और घर में सिक्के, सोना, चांदी या नए बर्तन रखना शुभ माना जाता है। साथ ही घर की सफाई करके दीपक जलाना और लक्ष्मी पूजा करना भी धन और समृद्धि लाने वाला काम माना जाता है।
धनतेरस क्यों मनाया जाता है?
धनतेरस का उत्सव धन्वंतरि और देवी लक्ष्मी की पूजा के लिए मनाया जाता है।
भगवान धन्वंतरि की पूजा-
- समुद्र मंथन के दौरान धन्वंतरि ने अमृत कलश के साथ प्रकट होकर रोगों और बीमारियों से मुक्ति का आशीर्वाद दिया।
- इसे स्वास्थ्य और रोगमुक्ति के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है।
देवी लक्ष्मी और धन की पूजा-
सोना, चांदी और बर्तन खरीदकर उन्हें पूजा स्थल पर रखकर दीपक जलाना समृद्धि और सौभाग्य लाता है।
परंपरा के अनुसार इस दिन दीपक जलाकर घर में सकारात्मक ऊर्जा लाना और दान देना अत्यंत फलदायक होता है। धनतेरस की कथा यह भी बताती है कि राजा ने यक्षिणियों और यक्षों से अपने घर को सुरक्षित रखने के लिए दीपक जलाए और धन की पूजा की, जिससे उसके घर में सौभाग्य और सुरक्षा बनी रही। इस प्रकार, धनतेरस केवल धन का उत्सव नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, सौभाग्य और समृद्धि का पर्व भी है, जिसे श्रद्धा और विधिपूर्वक मनाना चाहिए।
धनतेरस की पूजा विधि (Step-by-Step)
1. घर की सफाई और सजावट
पूजा से पहले घर को अच्छे से साफ करें।
दरवाजों और खिड़कियों पर रंगोली और दीपक सजाएँ।
2. पूजा सामग्री तैयार करें
- भगवान धन्वंतरि या देवी लक्ष्मी की मूर्ति/तस्वीर
- दीपक और तेल/घी
- फूल (सफेद और लाल)
- मिठाई और प्रसाद
- सिक्के, सोना/चांदी या नए बर्तन
3. पूजा क्रम
- घर के मंदिर या पूजा स्थल पर साफ कपड़ा और कलश रखें।
- सिक्के, सोने/चांदी की वस्तुएँ कलश के पास रखें।
- दीपक जलाएँ और आरती करें।
- धन्वंतरि मंत्र का जाप करें- ॐ नमो भद्राय धन्वंतरये
- लक्ष्मी पूजन करें और मिठाई/प्रसाद चढ़ाएँ।
- पूजा समाप्त होने के बाद दीपक घर के प्रवेश द्वार और कोनों में रखें।
धनतेरस पर शुभ कार्य और खरीदारी
- सोना, चांदी या नए बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।
- दीपक जलाना और सफाई करना घर में सकारात्मक ऊर्जा लाता है।
- इस दिन दान करना, जैसे अनाज, दूध या कपड़े देना, पुण्य का काम माना जाता है।
धनतेरस की कथा (Story)
धन्वंतरि की कथा-
- समुद्र मंथन के दौरान देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन किया।
- तब भगवान धन्वंतरि अमृत कलश और जड़ी-बूटियों के साथ प्रकट हुए।
- तभी से त्रयोदशी तिथि पर धन्वंतरि पूजन और स्वास्थ्य की कामना की जाती है।
यक्षिणी-यक्ष कथा-
दीपक जलाकर और धन की पूजा कर राजा ने अपनी सुरक्षा और सौभाग्य प्राप्त किया।
यही परंपरा आज भी धनतेरस पर दीपक जलाने और धन की पूजा में जारी है।
धनतेरस 2025 के लिए शुभ मुहूर्त
| कार्य | समय |
|---|---|
| पूजा आरंभ | 18 अक्टूबर, 12:20 PM |
| पूजन समाप्त | 19 अक्टूबर, 1:52 PM |
शुभ समय-त्रयोदशी तिथि के दौरान ही पूजा करना सबसे लाभकारी माना जाता है।
धनतेरस न केवल धन और समृद्धि का प्रतीक है, बल्कि यह स्वास्थ्य, सुख और सौभाग्य लाने वाला दिन भी है।
- घर की सफाई और दीपक जलाना,
- सोना/चांदी या नए बर्तन खरीदना,
- धन्वंतरि और लक्ष्मी पूजन करना,
यह सब धनतेरस को पूर्ण रूप से फलदायक बनाते हैं।
इस वर्ष 2025 में आप 18-19 अक्टूबर को इसे पूरी श्रद्धा और विधिपूर्वक मना सकते हैं।
धनतेरस 2025 FAQ (Frequently Asked Questions)
Q1-धनतेरस 2025 कब है?
इस वर्ष धनतेरस की तिथि 18 अक्टूबर, 2025, दोपहर 12:20 बजे से शुरू होकर 19 अक्टूबर, 2025, दोपहर 1:52 बजे तक है।
Q2- धनतेरस क्यों मनाया जाता है?
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि और देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। यह दिन धन, स्वास्थ्य और समृद्धि लाने के लिए शुभ माना जाता है।
Q3- धनतेरस पर क्या किया जाता है?
इस दिन घर की सफाई, दीपक जलाना, धन्वंतरि और लक्ष्मी पूजन करना, और सोना, चांदी या नए बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। साथ ही दान करना भी लाभकारी है।
Q4- धनतेरस पर कौन सा मुहूर्त शुभ है?
पूजा का शुभ मुहूर्त 18 अक्टूबर, दोपहर 12:20 बजे से शुरू होकर 19 अक्टूबर, दोपहर 1:52 बजे तक रहेगा। इस समय पूजा करना सबसे फलदायक माना जाता है।
Q5- धनतेरस पर कौन-कौन से मंत्र जपे जाते हैं?
सबसे प्रमुख मंत्र हैं-
धन्वंतरि मंत्र- ॐ नमो भद्राय धन्वंतरये
लक्ष्मी मंत्र- ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः
Q6- धनतेरस पर कौन सी खरीदारी शुभ होती है?
इस दिन सोना, चांदी, नए बर्तन, गहने या संपत्ति खरीदना शुभ माना जाता है। यह घर में धन और सौभाग्य लाने वाला माना जाता है।
Q7- धनतेरस की कथा क्या है?
समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि अमृत कलश और जड़ी-बूटियों के साथ प्रकट हुए। इस दिन दीपक जलाकर और धन की पूजा करने की परंपरा चलती है।
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