महात्मा गांधी का जीवन और दर्शन- गांधी जयंती 2025 पर विशेष
गांधी जयंती और जन्म परिचय
भारत हर साल 2 अक्टूबर को गांधी जयंती मनाता है, जो राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी की जयंती का प्रतीक है। 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में जन्मे गांधीजी ने सत्य, अहिंसा और नैतिकता के मार्ग पर चलकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी। उनके पिता करमचंद गांधी पोरबंदर के दीवान थे और माता पुतलीबाई धार्मिक एवं संयमी स्वभाव की महिला थीं, जिनसे गांधीजी ने सत्य और करुणा का संस्कार पाया। 13 वर्ष की आयु में उनका विवाह कस्तूरबा गांधी से हुआ और आगे चलकर वे इंग्लैंड गए, जहाँ उन्होंने लंदन के इनर टेम्पल से कानून की पढ़ाई की।
दक्षिण अफ्रीका का अनुभव और सत्याग्रह की शुरुआत
प्रारंभिक जीवन में वकालत में कठिनाइयों का सामना करते हुए गांधीजी दक्षिण अफ्रीका पहुँचे, जहाँ भारतीयों के साथ हो रहे नस्लीय भेदभाव ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। यहीं उन्होंने सत्याग्रह की अवधारणा विकसित की और अहिंसक प्रतिरोध का नया मार्ग दुनिया को दिखाया। भारत लौटने के बाद उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में जनता को जोड़ा और कई आंदोलनों का नेतृत्व किया।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में गांधीजी का योगदान
1919 में रौलेट एक्ट के विरोध से लेकर 1930 के नमक सत्याग्रह और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन तक, उनके आंदोलनों ने अंग्रेजी शासन की नींव हिला दी। गांधीजी का नेतृत्व भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का आधार बना और जनता को पहली बार बड़े पैमाने पर संगठित किया।
महात्मा गांधी जी के विचार और दर्शन
गांधीजी के जीवन का सार उनके विचारों में निहित था। वे मानते थे कि अहिंसा ही सबसे बड़ी शक्ति है और सत्याग्रह के जरिए अन्याय का मुकाबला किया जा सकता है। उन्होंने स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित किया, विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और खादी अपनाने का संदेश दिया। जातिगत भेदभाव और अस्पृश्यता को दूर करने के लिए उन्होंने हरिजन उत्थान आंदोलन चलाया और सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान की बात की। उनके लिए सादगीपूर्ण जीवन, ईमानदारी और अनुशासन ही सबसे बड़े मूल्य थे।
स्वतंत्रता, विभाजन और अंतिम दिन
1947 में स्वतंत्रता के बाद विभाजन और साम्प्रदायिक हिंसा ने उन्हें गहरी पीड़ा दी। उन्होंने उपवास रखकर और शांति स्थापित करने का प्रयास कर लोगों को भाईचारे का संदेश दिया। किंतु 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली में नाथूराम गोडसे ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी।
गांधीजी की आज की प्रासंगिकता
आज गांधीजी केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए शांति, करुणा और अहिंसा के प्रतीक हैं। उनके विचार मार्टिन लूथर किंग जूनियर, नेल्सन मंडेला जैसे नेताओं के लिए प्रेरणा बने। गांधी जयंती हमें यह स्मरण कराती है कि सच्चा राष्ट्र निर्माण केवल शक्ति से नहीं, बल्कि सत्य, प्रेम और अहिंसा के मार्ग से ही संभव है।
FAQ
Q1- गांधी जयंती कब मनाई जाती है?
गांधी जयंती हर साल 2 अक्टूबर को मनाई जाती है, जो महात्मा गांधी का जन्मदिन है।
Q2- महात्मा गांधी का जन्म और परिवार कौन था?
गांधीजी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर, गुजरात में हुआ था।
उनके पिता करमचंद गांधी पोरबंदर के दीवान थे और माता पुतलीबाई धार्मिक स्वभाव की महिला थीं।
Q3-गांधीजी ने सत्याग्रह और अहिंसा का क्या संदेश दिया?
गांधीजी ने अहिंसा को सबसे बड़ी शक्ति माना और सत्याग्रह के जरिए अन्याय के खिलाफ अहिंसक प्रतिरोध का मार्ग दिखाया।
Q4-महात्मा गांधी का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान क्या था?
गांधीजी ने रौलेट एक्ट विरोध, नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे बड़े आंदोलन चलाए, जिससे भारतीय जनता संगठित हुई और स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा मिली।
Q5-गांधीजी के विचार आज क्यों प्रासंगिक हैं?
गांधीजी के विचार—अहिंसा, सत्य, स्वदेशी, सामाजिक समानता और सादगी—आज भी शांति, नैतिक नेतृत्व और सामाजिक सुधार के लिए प्रेरणादायक हैं।
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