गोवर्धन पूजा 2025-तिथि, समय, पूजा विधि, कथा और महत्व

गोवर्धन पूजा 2025

गोवर्धन पूजा या अन्नकूट उत्सव दिवाली के अगले दिन मनाया जाने वाला पवित्र पर्व है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर इंद्र के अहंकार को पराजित करने की स्मृति में मनाया जाता है। इस पर्व का धार्मिक, आध्यात्मिक और पर्यावरणीय महत्व अत्यंत गहरा है। आइए जानते हैं 2025 में गोवर्धन पूजा कब है, उसका शुभ मुहूर्त, कथा, पूजा विधि और महत्व विस्तार से।

गोवर्धन पूजा 2025 की तिथि और मुहूर्त

पर्व तिथि- बुधवार, 22 अक्टूबर 2025

प्रतिपदा तिथि प्रारंभ- 21 अक्टूबर 2025, रात 10:22 बजे

प्रतिपदा तिथि समाप्त- 22 अक्टूबर 2025, रात 8:40 बजे

गोवर्धन पूजा मुहूर्त- प्रातः 06:28 बजे से दोपहर 10:10 बजे तक (लगभग 3 घंटे 42 मिनट)

पर्वदिन-22 अक्टूबर 2025 (बुधवार)

इस प्रकार गोवर्धन पूजा 2025 में 22 अक्टूबर को मनाई जाएगी, क्योंकि प्रतिपदा तिथि का सूर्योदय उसी दिन होता है।

गोवर्धन पूजा का महत्व

गोवर्धन पूजा केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि यह प्रकृति, पर्यावरण और गौ-सेवा का प्रतीक पर्व है।
इस दिन लोग गोवर्धन पर्वत, गौमाता, और श्रीकृष्ण की संयुक्त रूप से पूजा करते हैं।
यह पर्व हमें सिखाता है कि —

“देवताओं से भी पहले हमें प्रकृति और धरती माता का सम्मान करना चाहिए।”

गोवर्धन पूजा की कथा (श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार)

एक बार ब्रजवासी वर्षा के देवता इंद्र की पूजा की तैयारी कर रहे थे।
तब भगवान श्रीकृष्ण ने उनसे पूछा —
“हम इंद्र की पूजा क्यों करें? हमारी जीविका तो गोवर्धन पर्वत, गौमाता और प्रकृति से चलती है।”

ब्रजवासी श्रीकृष्ण की बात से सहमत हो गए और उन्होंने गोवर्धन पर्वत की पूजा की।
इंद्र क्रोधित होकर भयंकर वर्षा और तूफ़ान ले आए।
तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली से गोवर्धन पर्वत उठाया, ताकि सभी ब्रजवासी, गौएँ और जीव-जंतु उसकी शरण में सुरक्षित रह सकें।
सात दिन तक वर्षा होने के बाद इंद्र को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी।
तभी से यह पर्व गोवर्धन पूजा या अन्नकूट उत्सव के रूप में मनाया जाने लगा।

गोवर्धन पूजा विधि (Step-by-Step)

1. गोवर्धन पर्वत का निर्माण

  • आंगन या मंदिर में गोबर या मिट्टी से गोवर्धन पर्वत का आकार बनाएं।
  • उसमें पेड़, जानवर, ग्वाले, गौमाता आदि के प्रतीक बनाएं।
  • पर्वत के चारों ओर दीपक जलाएं।

2. पूजा सामग्री

दूध, दही, घी, शहद, जल, पुष्प, तुलसी पत्ता, गौमूत्र, चावल और मिठाई।

3. पूजा विधि

  • गोवर्धनधारिणे नमः” मंत्र का जाप करें।
  • गोवर्धन पर्वत, गौमाता और श्रीकृष्ण को भोग अर्पित करें।
  • घर के सभी सदस्य पर्वत की परिक्रमा (7 बार) करें।
  • पूजा के बाद भगवान को अन्नकूट का भोग लगाया जाता है।

4. अन्नकूट का आयोजन

इस दिन घरों और मंदिरों में विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाकर भगवान को अर्पित किए जाते हैं।

कई स्थानों पर छप्पन भोग का भी आयोजन किया जाता है।

गोवर्धन पूजा का आध्यात्मिक संदेश

  1. प्रकृति और पर्यावरण की पूजा का प्रतीक
    — हमें अपनी समृद्धि के लिए प्रकृति का आभार व्यक्त करना चाहिए।
  2. गौसेवा का महत्व
    — इस दिन गौमाता की पूजा करने से जीवन में सुख-संपत्ति आती है।
  3. अहंकार पर विजय का पर्व
    — श्रीकृष्ण ने इंद्र के अहंकार को तोड़कर विनम्रता का संदेश दिया।
  4. सद्भाव और एकता का प्रतीक
    — यह पर्व समाज और परिवार में एकजुटता को प्रोत्साहित करता है।

गोवर्धन पूजा मंत्र

“गोवर्धनधारिणे नमः।
श्रीकृष्णाय शरणं मम॥”

या

“अन्नकूटं प्रदास्यामि गोवर्धन नमोऽस्तु ते।”

गोवर्धन पूजा से जुड़े प्रश्न (FAQs)

Q1. गोवर्धन पूजा 2025 में कब है?
 22 अक्टूबर 2025, बुधवार को गोवर्धन पूजा मनाई जाएगी।

Q2. गोवर्धन पूजा किस दिन होती है?
दीपावली के अगले दिन, यानी कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को।

Q3. गोवर्धन पूजा किसकी स्मृति में मनाई जाती है?
भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों को वर्षा से बचाने की स्मृति में।

Q4. इस दिन कौन-सी पूजा विशेष होती है?
 गोवर्धन पर्वत, गौमाता और श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है।
और “अन्नकूट महोत्सव” के रूप में विभिन्न व्यंजन अर्पित किए जाते हैं।

Q5. गोवर्धन पूजा का क्या संदेश है?
यह पर्व सिखाता है कि हमें प्रकृति, पशु-पक्षी और धरती का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि वही हमारा जीवन आधार हैं।

गोवर्धन पूजा हमें यह सिखाती है कि प्रकृति ही परम शक्ति है
भगवान श्रीकृष्ण ने इस पर्व के माध्यम से बताया कि प्रकृति की रक्षा और सेवा ही सच्ची भक्ति है
इस दिन गोवर्धन पर्वत, गौमाता और श्रीकृष्ण की पूजा कर हम समृद्धि, शांति और आशीर्वाद की प्राप्ति करते हैं।

“गोवर्धन पूजा केवल पर्व नहीं — यह धरती माता, गौमाता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का उत्सव है।”

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