ईद (Eid)क्यों मनाई जाती है?
Eid इस्लाम धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे पूरे विश्व में मुसलमान बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाते हैं।
ईद मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है:
ईद-उल-फितर – यह रमज़ान के महीने के बाद आती है और इसे “मीठी ईद” भी कहा जाता है।
ईद-उल-अजहा – इसे “बकरीद” या कुर्बानी की ईद कहा जाता है।
ईद-उल-फितर को रमज़ान के एक महीने के कठिन रोज़ों के बाद मनाया जाता है।
यह एक तरह से अल्लाह का शुक्रिया अदा करने का दिन होता है कि उसने रोज़े पूरे करने की तौफीक़ दी।
(Eid) ईद कैसे तय की जाती है?
ईद-उल-फ़ित्र 2025 की तिथि चंद्रमा के दर्शन पर निर्भर करती है। इस्लामी कैलेंडर के अनुसार, शव्वाल महीने का पहला दिन ईद के रूप में मनाया जाता है।
जो रमज़ान के पवित्र महीने के समापन का संकेत देता है। चूंकि इस्लामी महीनों की शुरुआत चंद्रमा के दिखने पर आधारित होती है, इसलिए ईद की तिथि हर साल बदलती रहती है।
सऊदी अरब में शव्वाल 1446 हिजरी का चाँद 29 मार्च 2025 को दिखाई दिया, जिसके आधार पर वहाँ 30 मार्च 2025 को ईद मनाई गई।
भारत में, चंद्रमा के दर्शन एक दिन बाद होते हैं, इसलिए यहाँ 31 मार्च 2025 को ईद-उल-फ़ित्र मनाई गई।
ईद का दिन इस्लामी कैलेंडर के अनुसार तय किया जाता है। इस्लामी कैलेंडर चंद्रमा (मून) पर आधारित होता है।
इसलिए हर महीने की शुरुआत और अंत चाँद देखने पर निर्भर करता है।
ईद-उल-फितर का दिन रमज़ान के 29 या 30 रोज़ों के बाद शव्वाल महीने के पहले दिन मनाया जाता है।
जब नए चाँद का दीदार होता है, तभी ईद मनाने की घोषणा की जाती है।
रमज़ान क्या है और इसमें रोज़ा कैसे रखा जाता है?
रमज़ान इस्लाम का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस महीने में मुसलमान अल्लाह की इबादत करते हैं, कुर।न की तिलावत करते हैं।
और पूरे दिन भूखे-प्यासे रहकर रोज़ा रखते हैं। रोज़े में सुबह सहरी करके रोज़ा रखा जाता है।
और फिर शाम को इफ़्तार के समय इसे खोला जाता है। रोज़े का मुख्य उद्देश्य आत्मसंयम, धैर्य और आध्यात्मिक शुद्धि को बढ़ाना है।
जुमे की नमाज़ क्या होती है?
जुमे की नमाज़ इस्लाम में बहुत महत्वपूर्ण होती है। यह हर हफ्ते शुक्रवार को दोपहर के समय अदा की जाती है।
इसे मस्जिद में सामूहिक रूप से पढ़ा जाता है।
और इसमें एक विशेष खुतबा (प्रवचन) दिया जाता है। शुक्रवार को विशेष माना जाता है ।
क्योंकि इस दिन की नमाज़ का सवाब (पुण्य) अधिक होता है।
ईद कैसे मनाई जाती है?
ईद के दिन मुसलमान सुबह जल्दी उठकर नहाते हैं, नए या साफ़ कपड़े पहनते हैं।
और ईदगाह में जाकर विशेष नमाज़ पढ़ते हैं।
इस दिन लोग एक-दूसरे से गले मिलकर “ईद मुबारक” कहते हैं और घर पर स्वादिष्ट पकवान बनाए जाते हैं।
गरीबों और जरूरतमंदों को ज़कात-उल-फितर दी जाती है ताकि वे भी ईद की खुशी मना सकें।
ईद केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, भाईचारे और सामाजिक समरसता का संदेश देता है।
रमज़ान का महीना हमें धैर्य और अनुशासन सिखाता है।
और ईद इस कठिन तपस्या का इनाम होता है, जिसे पूरे हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है।

