रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले कुछ हफ्तों से जो कुछ हो रहा है, उसने एक नाम को अचानक हर जगह पहुंचा दिया है — देवेंद्र नाथ महतो। भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की, और उसके बाद से सोशल मीडिया पर उन्हें “झारखंड का सोनम वांगचुक” कहा जाने लगा है। कई लोगों के लिए यह नाम बिल्कुल नया है, तो कुछ लोग उन्हें पहले से जानते हैं। दोनों तरह के पाठकों के लिए यहां उनके बारे में जरूरी बातें रखी जा रही हैं।
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले कुछ हफ्तों से जो कुछ हो रहा है, उसने एक नाम को अचानक हर जगह पहुंचा दिया है — देवेंद्र नाथ महतो। भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की, और उसके बाद से सोशल मीडिया पर उन्हें “झारखंड का सोनम वांगचुक” कहा जाने लगा है। कई लोगों के लिए यह नाम बिल्कुल नया है, तो कुछ लोग उन्हें पहले से जानते हैं। दोनों तरह के पाठकों के लिए यहां उनके बारे में जरूरी बातें रखी जा रही हैं।
कहां से आते हैं महतो
रांची जिले के राहे प्रखंड में कापीडीह नाम का एक गांव है — यहीं से देवेंद्र नाथ महतो का ताल्लुक है। स्कूली पढ़ाई बुंडू में हुई, उसके बाद उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची में दाखिला लिया। उन्होंने संस्कृत के साथ-साथ कुरमाली, ट्राइबल और क्षेत्रीय भाषाओं में भी पोस्टग्रेजुएशन किया है, और हजारीबाग से B.Ed. की डिग्री भी उनके पास है। यानी सिर्फ आंदोलनकारी की छवि तक उन्हें सीमित करना ठीक नहीं होगा — भाषा और शिक्षा को लेकर उनकी समझ काफी गहरी बताई जाती है।
2015 से जुड़ा हुआ नाम
महतो को अभी अचानक उभरा हुआ चेहरा समझना गलती होगी। रिपोर्टों के मुताबिक वे 2015 से ही छात्र मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं — स्कॉलरशिप में गड़बड़ी, पेपर लीक, भर्ती नियमों की खामियां, आरक्षण नीति और स्थानीय युवाओं के लिए अवसर, इन सबको लेकर वे लगातार बोलते रहे हैं। इसलिए जब JPSC-JSSC को लेकर मौजूदा विवाद खड़ा हुआ, तो उनके पास पहले से एक जमी हुई पहचान और छात्रों के बीच भरोसा मौजूद था।
भूख हड़ताल ने माहौल बदल दिया
झारखंड में सरकारी भर्ती को लेकर नाराज़गी नई नहीं है — पेपर लीक के आरोप, OMR शीट में गड़बड़ी की शिकायतें, पारदर्शिता की कमी, ये सब महीनों से चर्चा में रहे हैं। लेकिन महतो के अनशन पर बैठने के बाद मामला मीडिया और सरकार, दोनों की नजर में और गंभीर हो गया। अब सवाल सिर्फ छात्रों के बीच नहीं रह गया, सीधे प्रशासन से पूछा जाने लगा है कि भर्ती प्रक्रिया कितनी निष्पक्ष है।
मांगें क्या रखी गई हैं
- 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द हो
- भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता लाई जाए
- गड़बड़ियों की जांच CBI और ED से कराई जाए
महतो का कहना है कि विभागीय जांच से बात नहीं बनेगी, भरोसा तभी लौटेगा जब जांच किसी बाहरी और स्वतंत्र एजेंसी से हो।
राजनीति में भी कदम
महतो सिर्फ छात्र नेता तक सीमित नहीं रहे। 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में उन्होंने चुनाव भी लड़ा था। उनके निर्वाचन क्षेत्र को लेकर अलग-अलग जगह अलग जानकारी मिलती है, पर इतना तय है कि उनका रास्ता छात्र आंदोलन से निकलकर सीधी राजनीति तक पहुंच चुका है।
तुलना सोनम वांगचुक से क्यों
सोनम वांगचुक ने NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की खामियों को लेकर भूख हड़ताल के जरिए देशभर का ध्यान खींचा था। महतो का तरीका भी मिलता-जुलता है — शांत विरोध, पर संदेश तीखा। दोनों मामलों में एक ही बात उभरती है: जब शिक्षा और भर्ती व्यवस्था पर सवाल उठें और जवाब न मिले, तो युवाओं का भरोसा टूटता है।
युवाओं के बीच पकड़ की वजह
गांव से जुड़ी पृष्ठभूमि, स्थानीय भाषा-संस्कृति की समझ और लंबे समय का छात्र संघर्ष — ये तीनों चीजें एक साथ मिलकर महतो को बाकी प्रदर्शनकारियों से अलग बनाती हैं। इसी वजह से वे उन हजारों अभ्यर्थियों की आवाज़ बनते दिख रहे हैं जो महीनों से रिज़ल्ट और चयन प्रक्रिया को लेकर परेशान हैं।
देवेंद्र नाथ महतो का नाम आज झारखंड की भर्ती-विरोधी लड़ाई में सबसे आगे है। पढ़ाई, गांव की जड़ें, 2015 से चली सक्रियता, 2024 का चुनावी अनुभव और अब यह भूख हड़ताल — इन सबने मिलकर उन्हें एक ऐसे चेहरे में बदल दिया है जो सीधे सिस्टम से जवाब मांग रहा है।

